*"लड़की"*
वो सुबह से शाम तक दौड़ती है,
घर की जिम्मेदारी, सपनों की उड़ान।
आँसू छुपा कर सबको हँसाती है,
खुद के दर्द को रखती है अनजान।
कभी बेटी, कभी बहन, कभी दोस्त,
हर रिश्ते को निभाती है जान से।
गिर कर भी उठ जाती है वो,
क्योंकि हार मानना आता ही नहीं उसे।
छोटी-छोटी खुशियों में जी लेती है,
बड़े-बड़े तूफानों से लड़ लेती है।
वो कमजोर नहीं है,
वो तो बस एक लड़की है...
जो दुनिया बदलने का हौसला रखती है। ❤️