हमनें सितारों की बात की
कभी लुटाये नही
वो भी आने की बात करते
कभी आये नहीं
धुल की निगाहें, हैं जमी इस खिड़की पर
पर्दो को रहने दो, हटाये नहीं
आज परिंदे मेरी छत पे हीे सो गये
ये बात जगाकर सय्याद को कोई बताये नहीं
थरराह उठी दिवार मेरे कमरें की
सिरहाने रक्खा चिराग मेरे कोई बुझाये नहीं
मुझे मिट्टी में रख दो बस जल्द से जल्द
बेकरारी और मेरी यूँ बढायें नहीं