हार मानकर बैठने वाला इंसान क्या कुछ कर पाता है?
या अनुभवों की सीख से नई राह बनाता है?
जो ठोकरों से सीख ले, वही आगे बढ़ जाता है,
जो केवल सोचता ही रह जाए, वही फिर गिर जाता है।
अगर ऊँची उड़ान भरनी है,
तो मेहनत का हाथ थाम ले।
एक कोशिश तो करके देख,
अपने सपनों को नया मुकाम दे।
एक बार गिरने से क्या
पूरी ज़िंदगी के लिए हार गए हो?
अगर आसमान छूना है,
तो फिर अब तक उठे क्यों नहीं हो?
हौसलों की लौ जलाए रख,
मुश्किलों से कभी मत डर।
हर अँधेरी रात के बाद
नई सुबह आती है हर पल।
याद रख, मंज़िल उसी को मिलती है
जो गिरकर भी संभल जाता है।
हार नहीं, हर ठोकर से सीखकर
अपने जीवन को सफल बनाता है।