पुरुष
पुरुष का अपना परिवार होता है
परिवार चलाने यहाँ वहाँ फिरता है
जेब तो पहली तारीख भर लेता है
बांटते बांटते फिर खाली हो जाता है
फोन पर घर का हालचाल पूछ लेता है
अपना बेहाल अक्सर छूपा लेता है
घर की शिकायतें सुलझाता रहता है
खूद की शिकायतें दफ़न कर देता है
सस्ता खाना खाकर महिना गुजार लेता है
गरम ठंडा पसंद नापसंद सब भूल जाता है