माँ
हमको जन्म दिया जिसने,
रूबरू कराया इस जहाँ से।
सींचा हमें एक नन्हे पौधे-सा,
अपने स्नेह और दुलार से।
हमारा धन्यवाद उस माँ को,
जिसने अपने संस्कार देकर
हमें समाज में
सिर उठाकर जीना सिखाया।
जिसने अपनी पहचान से पहले
हमारी पहचान बनाई,
अपने हिस्से की खुशियाँ देकर
हमारी दुनिया सजाई।
हमारा धन्यवाद उस माँ को,
जिसने मुसीबतों से लड़ना सिखाया,
अन्याय के आगे न झुकना
और हमेशा न्याय के मार्ग पर चलना सिखाया।
गलती पर डाँट भी लगाई,
सफलता पर पीठ भी थपथपाई।
हर मोड़ पर
माँ बनकर ही नहीं,
हमारी सबसे पहली गुरु बनकर साथ निभाया।
और अंत में
हमारा धन्यवाद उस ईश्वर को,
जिसने अपने सबसे अनमोल उपहार से
हमें नवाज़ा।
माँ...
तुम सिर्फ़ एक रिश्ता नहीं,
ईश्वर का सबसे सुंदर रूप हो।