दुनिया अनेक रंगों से भरी हुई है । खुशी का रंग, दुख का रंग, दोस्ती का रंग, दुश्मनी का रंग, उनमें भी सबसे गहरा प्यार का रंग ! पर जब प्रेम की बात आती है, तो मन अनायास ही राधा-कृष्ण की ओर चला जाता है । उनका प्रेम किसी एक रंग में नहीं समाया । बल्कि प्रेम के हर रंग को अपने भीतर समेटे हुए था । वो प्रेम जो सिर्फ पाने में नहीं, समर्पण में था — जो साथ रहने में नहीं, बल्कि हर पल एक-दूसरे में बस जाने में था । शायद इसी कारण आज भी प्रेम का सबसे सुंदर रंग राधाकृष्ण के नाम से पहचाना जाता है ।