रुसवा चाहे तुमसे यह सारा ज़माना हो जाए,
मेरी जान, तुम खुद से कभी ख़फ़ा न होना।
लाख लगाएँ लोग तुम पर तोहमतें और लेबल,
उन झूठी बातों को कभी अपना सच न समझना।
तुम्हें तुमसे ज़्यादा न किसी ने चाहा है यहाँ,
न कोई तुम्हें इतनी शिद्दत से चाह सकेगा।
अपनी रूह की इस बेपनाह मोहब्बत को,
हमेशा अपने दिल के सबसे महफ़ूज़ कोने में सँजोए रखना।
खुद को इतनी पाकीज़ा शिद्दत से चाहना, मेरी जान,
कि एक दिन खुद ईश्वर भी मुस्कुराकर कह उठे—
“बस… अब बहुत हुआ इस दुनिया का इम्तिहान,
लौट आ अब मेरे पास,
मुझे तेरी ही ज़रूरत है।”
और जिसका हाथ थाम लिया हो खुद उस परवरदिगार ने,
उसे फिर इस जहाँ में
किसी और के हाथ, किसी और के साथ,
या किसी और के सहारे की
कभी कोई ज़रूरत नहीं रहती।रुसवा चाहे तुमसे यह सारा ज़माना हो जाए,
मेरी जान, तुम खुद से कभी ख़फ़ा न होना।
लाख लगाएँ लोग तुम पर तोहमतें और लेबल,
उन झूठी बातों को कभी अपना सच न समझना।
तुम्हें तुमसे ज़्यादा न किसी ने चाहा है यहाँ,
न कोई तुम्हें इतनी शिद्दत से चाह सकेगा।
अपनी रूह की इस बेपनाह मोहब्बत को,
हमेशा अपने दिल के सबसे महफ़ूज़ कोने में सँजोए रखना।
खुद को इतनी पाकीज़ा शिद्दत से चाहना, मेरी जान,
कि एक दिन खुद ईश्वर भी मुस्कुराकर कह उठे—
“बस… अब बहुत हुआ इस दुनिया का इम्तिहान,
लौट आ अब मेरे पास,
मुझे तेरी ही ज़रूरत है।”
और जिसका हाथ थाम लिया हो खुद उस परवरदिगार ने,
उसे फिर इस जहाँ में
किसी और के हाथ, किसी और के साथ,
या किसी और के सहारे की
कभी कोई ज़रूरत नहीं रहती।