🌸" मैं सत्य"🌸🌸
मैं अचल सत।
मैं प्रबल सत ।
मन मेरा कुछ सबल सत।
पर ठहरा हूं मै सफल सत।
हार को कर दूं विफल सत।
सपनों को रखूं विमल सत।
अंधेरों में भी उज्जवल सत।
इरादों को रखूं निश्चल सत।
दुनिया बोले क्या छल सत....?
मैं चलूं अपने बल सत।
गिरु तो फिर संभल सत।
क्योंकि रगो में है ज्वाल सत।
मेरे आगे सब विकल्प से।
मंजिल मिले मेरे संकल्प से।
जो झुके नहीं वो हूं मैं सत!
वो हूं मैं सत!
वो हूं मैं सत!
दीप की कलम से ✍️✍️