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सुबह की आस🌸🌸 रोज़ सुबह मेरे आँगन में चिड़ियों की सुनती हूँ गूँज नई। उस गूँज के साथ मिलती मुझे कुछ पाने की आस नई। उस आस में छिपा हर हौसला दिखलाए मंज़िल एक नई। हर सुबह की सुनहरी किरण भर दे जीवन में रोशनी नई। हर सुबह की मधुर उजियारी जगाए कुछ करने की चाह नई। जीवन का हर स्वर्णिम सवेरा देता हमको संदेश यही— दीप की कलम से✍️✍️
सपनों सा यह आसमान 🌸🌸 कल देखा एक सपना। उस सपने में था अपना। अपनों की इस दुनिया में। न जाने क्यों उलझा मन मेरा। कहीं अनकही पहेलियां है। कहीं अनसुलझी कहानियाँ है। कहीं इस भरी भीड़ में। आसमान ही बस मेरा है। देख सपनों सा यह आसमान। मन में उमड़े नए अरमान। छूलू सारा यह जहांन। हर दिन बने मेरी पहचान। दीप की कलम से✍️✍️
🌸" मैं सत्य"🌸🌸 मैं अचल सत। मैं प्रबल सत । मन मेरा कुछ सबल सत। पर ठहरा हूं मै सफल सत। हार को कर दूं विफल सत। सपनों को रखूं विमल सत। अंधेरों में भी उज्जवल सत। इरादों को रखूं निश्चल सत। दुनिया बोले क्या छल सत....? मैं चलूं अपने बल सत। गिरु तो फिर संभल सत। क्योंकि रगो में है ज्वाल सत। मेरे आगे सब विकल्प से। मंजिल मिले मेरे संकल्प से। जो झुके नहीं वो हूं मैं सत! वो हूं मैं सत! वो हूं मैं सत! दीप की कलम से ✍️✍️
जीवन के रंग हौसलों के संग। कभी खुशी, कभी ग़म, यही है जीवन के रंग। इसकी एक कहानी सुन, हौसलों की एक डोर बुन। उस डोर पर तू अटल चल, डगमग हो तो तू फिर संभल। अपनी मंज़िल की राह तू चुन, उस राह पर गुनगुना एक धुन। उस धुन से एक हौसला बढ़ेगा, सपनों को नया आसरा मिलेगा। कभी खुशी, कभी ग़म, यही है जीवन के रंग। दीप की कलम से ✍️
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