Quotes by deepali bhatia in Bitesapp read free

deepali bhatia

deepali bhatia

@deepkikalam
(238)

मांँ👩‍🍼



माँ, तू एक शब्द नहीं, तू मेरा सहारा है। माँ, तू एक शब्द नहीं, तू मेरा साया है। माँ, तू एक शब्द नहीं, तू मेरा किनारा है।
माँ, तू एक शब्द नहीं, तू मेरा जग सारा है।

माँ, तू मेरी हर खुशी की वजह है। माँ, तू मेरी हर मुश्किल में हौसला है।
माँ, तू मेरी हर दुआ का सबसे प्यारा जवाब है।
माँ, तू मेरी खामोशी को भी समझने वाली आवाज़ है। माँ, तू मेरी थकी हुई ज़िंदगी का सुकून है।
माँ, तू मेरे हर कदम पर चलती हुई दुआ है।
माँ, तू सिर्फ़ मेरी माँ नहीं, मेरी पूरी दुनिया है। ❤️




दीप ✍️✍️

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🌸सफर🌸🌸

मुश्किल है सफर लंबी है डगर।
चलना है मगर होके बेफिक्र।

करना है अगर जीवन का बसर।
तो होकर मनफक्र।
कर ले तू सबर।

जीवन का यही सार है।
अब ना कर -इंकार है…




दीप ✍️✍️

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🌸 मैं "नारी'' 🌸🌸

मैं अटल हूँ, मैं सफल हूँ,
हर मुश्किल में भी अविचल हूँ।
मैं शक्ति हूँ, मैं साहस हूँ,
मैं अपनी एक पहचान हूँ।

जो ठान लिया, वो कर दिखाऊँ,
मैं हौसलों की एक उड़ान हूँ।
नारी के हर रूप में
मैं सम्मान और स्वाभिमान हूँ।

मैं नारी हूँ, मैं शक्ति हूँ,
मैं सपनों की उड़ान हूँ।
अपने दम पर आगे बढ़ती,
मैं भारत की पहचान हूँ।




दीप ✍️✍️

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सुबह की आस🌸🌸


रोज़ सुबह मेरे आँगन में
चिड़ियों की सुनती हूँ गूँज नई।

उस गूँज के साथ मिलती मुझे
कुछ पाने की आस नई।

उस आस में छिपा हर हौसला
दिखलाए मंज़िल एक नई।

हर सुबह की सुनहरी किरण
भर दे जीवन में रोशनी नई।

हर सुबह की मधुर उजियारी
जगाए कुछ करने की चाह नई।

जीवन का हर स्वर्णिम सवेरा
देता हमको संदेश यही—





दीप की कलम से✍️✍️

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🌸" मैं सत्य"🌸🌸


मैं अचल सत।
मैं प्रबल सत ।
मन मेरा कुछ सबल सत।
पर ठहरा हूं मै सफल सत।

हार को कर दूं विफल सत।
सपनों को रखूं विमल सत।
अंधेरों में भी उज्जवल सत।
इरादों को रखूं निश्चल सत।


दुनिया बोले क्या छल सत....?
मैं चलूं अपने बल सत।
गिरु तो फिर संभल सत।
क्योंकि रगो में है ज्वाल सत।


मेरे आगे सब विकल्प से।
मंजिल मिले मेरे संकल्प से।
जो झुके नहीं वो हूं मैं सत!
वो हूं मैं सत!
वो हूं मैं सत!



दीप की कलम से ✍️✍️

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जीवन के रंग हौसलों के संग।

कभी खुशी, कभी ग़म,
यही है जीवन के रंग।

इसकी एक कहानी सुन,
हौसलों की एक डोर बुन।

उस डोर पर तू अटल चल,
डगमग हो तो तू फिर संभल।

अपनी मंज़िल की राह तू चुन,
उस राह पर गुनगुना एक धुन।

उस धुन से एक हौसला बढ़ेगा,
सपनों को नया आसरा मिलेगा।

कभी खुशी, कभी ग़म,
यही है जीवन के रंग।




दीप की कलम से ✍️

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