तुझसे मैं एक बात कहूँ
तुझको लम्बी रात कहूँ,
जब जब मानव युग आये
तुझसे अपना प्यार कहूँ।
अमृत कहीं रखा होगा
विष भी पहले पीना होगा,
जीवन के इस मंथन में
फूल हाथ में रखना होगा।
लो बीत गयी क्षण की माया
सन्नाटा उधर घिर आया,
लोग अव्यवस्थित दौड़ रहे
घर अपना भूल रहे।
राहों का कोई अन्त नहीं
आनन्द मेरा अनन्त नहीं,
तुझसे मैं एक बात कहूँ
मन में कोई दिगंत नहीं।
***
*** महेश रौतेला