मोहब्बत से मेरा क्या लेना-देना
न कभी मैंने देखा इसे, न महसूस किया
तो जिसे कभी देखा ही नहीं
उसे कैसे मान लूँ ?
और अचानक आए इस अनकहे एहसास को
कैसे अपना मान लूँ ?
कोई सबूत हो तो मुझे भी दिखाना ज़रा
आख़िर ये प्यार क्या है
मुझे भी बताना ज़रा
दिल में कुछ अजीब-सी बेचैनी होती है
जब वो मुझसे दूर हो जाता है
खुलती है नींद से जब आँखें मेरी
न जाने बिन बताए वो कहाँ छिप जाता है
पता नहीं क्यों सामने मेरे
वो आना नहीं चाहता है
फिर दिल में एक टीस-सी उठती है
जब अपने ख़्वाबों से मैं जाग उठती हूँ
रात से फिर सुबह हो गई है
ये जानती हूँ
कोई नहीं है हक़ीक़त में
जब धीरे से ये बात मानती हूँ
अरे, मैं मोहब्बत करना कहाँ जानती हूँ
किसी को अपना मैं कहाँ मानती हूँ
प्यार क्या है, ये जानना भी
मैं अब कहाँ चाहती हूँ
वैसे भी …
आख़िर मोहब्बत से मेरा क्या लेना-देना ?
- अवंतिका