*शीर्षक: मेरी सुन्दर सी बगिया*
आज मैं आपको मिलवाती हूँ अपने दोस्त से
मेरी बगिया है मेरी साथी
मेरे सुख-दुःख की साथी
स्पेस कम होता है किराये के घर में
लेकिन मेरी बालकनी ही बहुत है
मेरी सुबह का सुकून
मेरी शाम की सहेली
तुलसी, गेंदा, चंपा और चमेली
सदाबहार की जीवन-ता
अपराजिता की जीत
मेरे मन को अच्छे लगते
इन पौधों के गीत
जब नया फूल खिलता इन पर
खुशी से झूम उठता मन
शोर मचाकर सबको बताऊँ
नया फूल खिला है सबको दिखाऊँ
प्रकृति की अद्भुत रचना
पौधों को नित बढ़ते देखना
कितना सुकून है मेरी बगिया में
खुशी से रोज निहारती जाऊँ
अब और कहीं ना लगे मन
मुझको भाए मेरी सुन्दर सी बगिया
साथ निभाए मेरी सुन्दर सी बगिया
मेरी प्यारी सुन्दर सी बगिया
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*डॉ वंदना शर्मा पांडव नगर new delhi