15/12/2025
आत्मा
न नजर से दिखती है
न हाथों से छू पाती है,
एक नर्म-सी ऊर्जा
हमारे भीतर बसती है।
वो न धर्म देखता, न जात
सामने जो आए उसी में घुस जाए,
समय को देकर मात ।
शून्यता ही उसकी रूप है
शून्यता ही शिव,
इसी शून्यता से डरते हैं
जगत के हर एक जीव ।
आमा है अमर समय के परे चलता
सच्चाई की राह में, सजीव बहता।
उसका न कोई अपना है
न ही अनुभव और भावना,
परमात्मा का अंश है
शुद्ध आनंदमय चेतना ।
कर्म उसका राह है
प्रेम उसका गीत,
ज्ञान उसकी शक्ति है
शांति उसकी प्रीत ।