मैं हार नहीं मानूँगा
गिरा हूँ कई बार राहों में, पर रुकना मैंने सीखा नहीं, आँधियों ने लाख कोशिश की, पर झुकना मैंने सीखा नहीं।
जब-जब दुनिया हँसती मुझ पर, मैं और सँवर जाता हूँ, टूटे हुए हर एक सपने से, नया हौसला पाता हूँ।
काँटों ने रोका कदमों को, पत्थरों ने राहें रोकी, लेकिन मेरे इरादों के आगे, हर मुश्किल ने हार ही मानी।
मंज़िल दूर सही तो क्या, सफ़र अभी बाकी है, मेरी मेहनत की कलम से, किस्मत लिखना बाकी है।
एक दिन ऐसा भी आएगा, जब वक़्त मेरा नाम कहेगा, जिसे समझा था दुनिया ने कमज़ोर, वही इतिहास नया लिखेगा।
मैं मिट्टी का बना ज़रूर हूँ, मगर हौसला आसमान रखता हूँ, हार भले सौ बार मिले, पर मैं हार नहीं मानता हूँ।
✍️ "जो अपने सपनों के लिए लड़ता है, वही एक दिन अपनी कहानी खुद लिखता है।" 🌸✨