अस्पताल के जनरल वार्ड में दो मरीज थे। एक खिड़की के पास था और दूसरा चल नहीं सकता था। खिड़की वाला मरीज रोज़ बाहर की दुनिया का हाल सुनाता - "देखो, आज पार्क में बच्चे खेल रहे हैं, फूल खिले हैं।" दूसरा मरीज उन बातों के सहारे अपनी बीमारी भूल जाता। एक दिन खिड़की वाले मरीज की मृत्यु हो गई। जब दूसरे मरीज को खिड़की के पास शिफ्ट किया ने बाहर देखा- वहाँ सिर्फ एक अंधी दीवार थी। उसे समझ आया कि उसका साथी सिर्फ उसे जीने की उम्मीद देने के लिए मनगढ़ंत खूबसूरत कहानियाँ सुनाता था। बिना किसी रिश्ते के एक अजनबी ने दूसरे की ज़िंदगी में रंग भर दिए थे।