Dear parents,
आपके अपने कर्म ही आपकी वास्तविक पहचान और सम्मान तय करते हैं।
इसे अपनी संतान के व्यवहार पर निर्भर मत कीजिए।
हर बार बच्चों की गलतियों को
अपनी प्रतिष्ठा से जोड़ देना
ना उनके लिए उचित है,
ना आपके लिए।
संतान आपकी हो सकती है,
पर उसके विचार, उसके निर्णय
और उसके कर्म उसके अपने होते हैं।
उन्हें अपनी छवि का विस्तार बनाकर
आप उनके अस्तित्व को सीमित कर देते हैं।
संस्कार देना आपका दायित्व है,
पर हर परिणाम को अपने नाम से जोड़ लेना
एक अनावश्यक आग्रह है।
सम्मान विरासत में नहीं चलता,
वह प्रत्येक व्यक्ति अपने आचरण से अर्जित करता है।
इसलिए बेहतर यही है कि
आप अपने कर्मों पर ध्यान दें,
और उन्हें उनके हिस्से का जीवन
सम्मान के साथ जीने दें।