बहुत समय से मैं
भगवान की तरफ हूँ,
आँधी हो,तूफान हो
युद्ध हो,महायुद्ध हो,
अमीरी हो,गरीबी हो
मैं भगवान की तरफ रहता हूँ।
बाढ़ हो,सूखा होः
गर्मी हो, ठंड हो या वसंत हो
मेरी आशा-आकांक्षा उनमें रहती है।
गीता पढ़ता हूँ
लोक,परलोक की बातें समझ लेता हूँ,
"जो पहले ही मारे जा चुके हैं
उन्हें मारने का निमित्त मात्र बन
भगवान की ओर रहता हूँ।"
संशय से बाहर आने के लिए
कर्म बन जाता हूँ,
शायद भगवान ऐसा ही चाहते हैं।
****
*** महेश रौतेला