इसी प्यार के कारण
हम फिर-फिर मिलते हैं,
इसी प्यार के कारण
हम फिर-फिर लड़ते हैं।
इसी प्यार के कारण
आँसू नित बहते हैं,
इसी प्यार के कारण सब
राधे-राधे कहते हैं।
इसी प्यार की अगुवाई में
दुनिया नित चलती है,
इसी प्यार की परछाई में
राधा अब तक बैठी है।
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*** महेश रौतेला