खतरे के निशान से ऊपर बह रहा है
मेरी बढ़ती उम्र का अनुभव - जल
वक्त की बरसात थमने का नाम नहीं ले रही
पर मेरा साहस खड़ा है, अडिग, अचल…
चेहरे पर उभरती रेखाएँ कहती हैं,
कि हर वर्ष ने मुझे और निखारा है…
थकते कदमों के बावजूद भी मैंने
काम से अपना नाता और संवारा है…
भागते वक्त की तेज़ हवाओं में भी
मेरा जुनून दीपक-सा जलता रहा…
अब उम्र नहीं, मेरा हौसला बोलता है—
हर ढलती साँझ में मैं और सँवरती रही ।