मोहब्बत किसका नाम है ?
(१)
मोहब्बत रूह का आराम है,
खुदा का भेजा एक पैगाम है।
किसी की चाहतों का जाम है,
दिलों की धड़कनों का नाम है।
(२)
ये मीठा सा कोई एहसास है,
समंदर में भी जगती प्यास है।
मिलन की एक मीठी आस है,
जो दूर होकर भी बहुत पास है।
(३)
कभी ये ख्वाब की ताबीर है,
कभी हाथों की ये लकीर है।
ये आशिक के दिल की पीर है,
मगर फिर भी वही अमीर है।
(४)
ये छुपकर की गई मुलाक़ात है,
ये तारों से सजी एक रात है।
ये दो रूहों की पावन सौगात है,
ये सावन की झड़ी, बरसात है।
(५)
मोहब्बत दर्द की एक दवा है,
बसंती बाग की ठंडी हवा है।
निगाहों से बयां जो माजरा है,
यही तो ज़िंदगी का आसरा है।
(६)
कभी ये आग है जो जलाती है,
कभी शबनम सी ठंडक लाती है।
कभी ये नींद को भी उड़ाती है,
कभी मीठे से गीत गाती है।
(७)
ये होंठों पर सजी मुस्कान है,
ये बेज़ुबां दिलों की ज़ुबान है।
यही तो आशिकों की जान है,
इसी में बस रहा जहान है।
(८)
ये राधा और कृष्ण का साथ है,
ये शिव और शक्ति की बात है।
यही तो दुआओं का हाथ है,
मोहब्बत ही तो रब की ज़ात है।
(९)
मोहब्बत एक गहरा समंदर है,
छिपा जिसमें सुकूं का मंज़र है।
कभी ये फूल है, कभी खंजर है,
बिना इसके तो दिल बंजर है।
(१०)
ये वादों की कोई तदबीर नहीं,
ये पन्नों पर खिंची तस्वीर नहीं।
इसे काटे जो, ऐसी शमशीर नहीं,
मोहब्बत सी कोई तासीर नहीं।
(११)
ये सजदे में झुका हुआ सर है,
ये दुआओं से भरा एक घर है।
ये बेखौफ सा एक सफर है,
ये इबादत का ही तो असर है।
(१२)
ये वो मंदिर है जिसमें मूरत है,
ये वो शीशा है जिसमें सूरत है।
ये ही तो दिल की अब ज़रूरत है,
ये कितनी ही हसीन और खूबसूरत है।
(१३)
कभी ये धूप है, कभी ये छांव है,
ये शर्मीले से दिल का एक दांव है।
भंवर में फंसी जो, ये वो नाव है,
लगे जो जिगर पे, ये वो घाव है।
(१४)
मोहब्बत ज़िंदगी का सार है,
ये खुशियों का खिला बहार है।
ये कश्मकश है, और करार है,
ये वो मंज़िल है जिसका इंतज़ार है।
(१५)
ये जन्मों की पुरानी कोई प्रीत है,
ये होठों का मधुर सा गीत है।
ये धड़कन का अनूठा संगीत है,
ये हार के भी जो मिली, वो जीत है।
(१६)
ये वो धागा है जो दिल को बांधे,
ये वो तीर है जो नज़रों से साधे।
जो पूरे करे अधूरे इरादे,
ये वो कसमें हैं, और वो वादे।
(१७)
ये पूजा है, ये ही इबादत है,
ये तो जन्मों की कोई आदत है।
नज़र की ये हसीन नज़ाकत है,
ये मासूमों की एक शराफत है।
(१८)
ये वो रास्ता है जिस पर आशिक चले,
ये वो शमा है जिसमें परवाने जले।
ये वो फूल है जो कांटों में खिले,
ये वो मंज़िल है जो मुद्दतों में मिले।
(१९)
मोहब्बत ही तो बंदगी है दोस्तों,
ये रोशन सी एक ज़िंदगी है दोस्तों।
ये चाहत की सादगी है दोस्तों,
यही रूह की ताज़गी है दोस्तों।
(२०)
कभी ये फासलों की दूरी है,
कभी ये मिलने की मजबूरी है।
नज़र से जो मिले वो मंज़ूरी है,
मोहब्बत के बिना उम्र अधूरी है।
(२१)
ये खत में लिखी हुई कोई गज़ल है,
ये बीता हुआ वो सुनहरा कल है।
ये आंखों से छलकता हुआ जल है,
ये मीठा सा सब्र का वो फल है।
(२२)
ये यादों के संग उड़ती पतंग है,
ये वीराने में बजता मृदंग है।
ये सादगी है, और नया ढंग है,
ये तपस्या है, और सत्संग है।
(२३)
मोहब्बत एक गहरा खज़ाना है,
जिसे ढूंढने में बीता ज़माना है।
ये दीवानों का एक ठिकाना है,
हर एक धड़कन का ये तराना है।
(२४)
ये सूरज की पहली सी किरण है,
कस्तूरी महकता हुआ हिरण है।
ये पावन सा जीवन का आचरण है,
ये आत्मा का खुदा को समर्पण है।
(२५)
मोहब्बत से ही रौशन ये मुकाम है,
मोहब्बत ही तो मेरी सुबह-शाम है।
ये सूफी-संतों का मीठा कलाम है,
मेरी इस रचना का मोहब्बत को "स्वयम्'भू" सलाम है!
रचना: अश्विन राठौड़ "स्वयम्'भू