"स्त्री" एक "खिलौना" है...उसके "जज़्बातों" से कोई सात "फे़रे" लेकर खेलता है...तो कोई "प्रेम" का नाम लेकर...!!
यूंही मेरा लहज़ा और रवैया नहीं बदला है
मेरे हिस्से का ह़र क़िरदार ग़द्दार निकला है...!!
जो रिश्ता़ आपकी मानसिक स्थिति को ख़राब करे
वह कभी भी आपके जीवन को बेहतर नहीं बना सकता...!!
मैनें जी कर गुज़ारा है, हर वो लम्हा़
जहां लोग उलझ कर दम तोड़ देते हैं...!!
किसी को जिंदगी से निकालने के लिए उसे phone से block करना तस्वीरे मिटाना contact delete करना...ये सब बचकाना होता है.....मुझे लगता है किसी को जिंदगी से निकालने के लिए सबसे पहले उसे अपने ज़ेहन से निकालो....उसके बाद वो चाहे जहां दिखे... जहां रहे आपको कोई फर्क नहीं पड़ेगा और न ही पड़ना चाहिए...अगले को गिरने दो अपनी नज़र में... ख़ुद ब ख़ुद उतर जाने दो दिल से...!!
""लोग बदलते नहीं हैं...बे़नकाब़ होते हैं""
तुमने मुझे कभी खोया नही...तुमने मुझे धीरे-धीरे अनदेखा किया...तुमने मेरे भीतर के प्रेम को इतनी बार अनसुना किया, कि मेरी आत्मा ने खुद को बचाने के लिए
तुमसे ही दूर होना सीख लिया...तुमने मेरे आँसुओं को, कमज़ोरी समझा...!!
तुम्हें ये भी नहीं पता कि मै कब-कब टूटी हूँ...मै टूटी हूँ उस रात, जब मेरे शब्द काँप रहे थे... और तुम्हारे पास सिर्फ़ “समय नहीं” था...मै टूटी हूँ उस दिन जब मेरी आँखों मे समंदर था... और तुमने उसे सिर्फ़ “बहाना” कहकर टाल दिया...तुमने मुझे सिर्फ़ छोड़ा नही...तुमने मुझे अपने भीतर से अपमानित करके छोड़ा है... और अपमान वो चोट है, जो शरीर पर नही अस्तित्व पर लगती है...!!
बहुत कुछ दबाकर रखने से मर जाता है सबकुछ
जैसे कोई रिश्ता, कुछ चाहतें, ढेर सारे शौक़ और
एक मन...!!
""तुम तुम नहीं मेरी उम्मीदें थीं
जिसने सबसे ज्यादा दिल दुखाया है""...!!