चौपाई - विनय
विनय हमारी सुनिए रामा।
खड़ा हुआ हूँ तेरे धामा।।
मुझ पर कृपा तनिक तो कीजै।
सुध मेरी भी अब लै लीजै।।
आप सभी मम सुनो कहानी।
मीठी प्यारी मेरी बानी।।
विनय शील मम दाना-पानी।
करूं नहीं कोई मनमानी।।
आज विनय सुनता नहिं कोई।
कहते हैं सब किस्सा गोई।।
विनय मोल अब बचा नहीं है।
दंद-फंद ही पचा सही है।।
करके विनय बार इक देखो।
करुण कथा उसकी तुम पेखो।।
समय विनय का हुआ पुराना।
गाओ गीत मनोहर नाना।।
सुधीर श्रीवास्तव