क्या कहे आज की सुबह और ये कोहरा?
मंद मंद समीर जब तन को छुता है।
भीतर की सरोवर सी आग को शमा देता है।
बड़ी हलचल सी उठी थी,
लावा सी जलन थी,
धुआं धुआं सा श्वास तले था,
पर ये ठंड की ठिठुरती सी लहर,
मन को जैसे गोदी में बिठाया हो,
माथे पर स्नेह से हाथ रखा हो
और सुकून सी एक नींद में
सारे बाहरी भावों को भीतर में आनंद दे रहा है।।।।
- ભૂપેન પટેલ અજ્ઞાત