*ॐ नमः शिवाय*
*अतिवर्ती नक्षत्र उस स्थिति को कहते हैं जब कोई ग्रह किसी नक्षत्र में अत्यधिक तीव्र गति से प्रवेश करके बहुत कम समय में उसे पार कर जाता है।*
सरल शब्दों में
सामान्यतः कोई ग्रह एक नक्षत्र में निश्चित अवधि तक रहता है।
लेकिन जब वह अपनी औसत गति से अधिक तेज चलता है और नक्षत्र में टिके बिना शीघ्र निकल जाता है, तो उस नक्षत्र में उसकी स्थिति अतिवर्ती (Ativarti) कहलाती है।
ज्योतिषीय विशेषताएँ
अतिवर्ती ग्रह फल को जल्दी देता है, परन्तु
फल अस्थिर, अचानक या अल्पकालिक होता है।
ऐसा ग्रह व्यक्ति के जीवन में
अचानक घटनाएँ
शीघ्र लाभ या हानि
अधूरापन या जल्दबाज़ी
मानसिक अस्थिरता
जैसे प्रभाव दे सकता है।
किन ग्रहों में अतिवर्तन अधिक देखा जाता है
*चन्द्रमा (सबसे अधिक)*
बुध
शुक्र
कभी-कभी मंगल
*उदाहरण*
यदि चन्द्रमा किसी जन्मकुंडली में किसी नक्षत्र को अत्यंत शीघ्र पार कर रहा हो, तो उस नक्षत्र के स्वामी और कारकत्व के फल व्यक्ति के जीवन में तेज़ी से आते-जाते देखे जाते हैं।
शास्त्रीय संकेत
अतिवर्ती ग्रह को कभी-कभी
*अल्पफलदायक*
क्षणिक प्रभाव वाला
भी कहा गया है, जब तक कि वह शुभ भाव, शुभ दृष्टि या योग से समर्थ न हो।