१…“मैं बारिश बन गई थी”
_____________________
"मैं बारिश बन गई थी!"
"क्या कह रही हो
तुम कैसे बारिश बन गई?"
चादर ओढ़कर सो रही थी
सड़क पर
सड़क के फुटपाथ पर
किसीने पाव से उड़ाया मुझे
बकवास धूल कहकर
रोई मै उदास
ऊब बनकर
भर आया आसमान
काला सियाह अन्तिम साया
जिसने उड़ाया था मुझे
बकवास धूल कहकर
वह बारिश कहकर भाग गया
फिर आता आता
आया पानी
पानी पानी...
कितना पानी
मैं हो गई पानी
हो गई मै पानी
अब धूल न थी
मैं बेगानी
लेकिन हुआ कुछ ऐसा
सूरज निकल आया
सियाह काला बादल
डरकर सहमाया
उसने मुझे छोड़ा उसी रोड के ठेले पर
जहां मै अकड़ी थी, अपनी अकड़ पर
अब मैं न थी पानी
मैं न थी अब पानी
धूल सहमी बेगानी
बारिश के बाद
भूल गए सब
धूल थी कितनी
कितनी थी धूल।
******