Hindi Quote in Poem by Arya Deep

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'‘अँधेरा, फिर नया सवेरा’’

बड़ी दिनों बाद लिखना शुरू किया है,
फिर से पानी में जहर घोल पीना शुरू किया है,
अब देश का हाल समझ नहीं आता,
कब क्या हो जाय कोई जान नही पाता।

हर इंसान डरा- डरा है,
पता नही कौन अपना है,
धूर्त लोग फैल गये हर जगह,
कहाँ- कहाँ फैले, कहाँ पता है,
प्रकृति भी अब नाराज है- आपदाओ ने छीना घर- बार है।

कहीं जमीन फिसल रही,
कहीं छ्ते टूट रहे,
कलयुग बढ़ रहा - सब उलट- पलट कर रहा।

अब देश वैसा नही रहा,
अपराधो ने इसे चारों ओर से घेर लिया है,
आतंक चोरी पेपर लिक, रेप और डकैती,
अब हर मसुमियत इसकी कीमत चुका रहा है।

हर अँधेरा- रोशनी लाता लाता है,
देश में युवा है, वीर जवान है,
हर koi आवाज उठाता है,
अब वक़्त आ गया है- हम सुधारेंगे, हम लड़ेंगे, hm बदलेंगे।

अब चुप- सा रहना गुनहेगार- सा लगता है,
देश के लिए कुछ करना अब जरूरी लगता है,
मैं लिखता हूँ, क्योंकि यही हर युवा की बात है,
hr लफ़्ज एक तीर है- जो systum के झूट को चीर दे।।

write✍️ by.
AryaDeep..

Hindi Poem by Arya Deep : 112001977
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