🌹 बार-बार...
> टूटा है दिल मेरा,
एक बार नहीं... कई बार।
रूठा हूँ मैं,
एक बार नहीं... कई बार।
भूखा सोया हूँ मैं,
एक बार नहीं... कई बार।
रोया हूँ मैं,
एक बार नहीं... कई बार।
> इन “कई बार” ने तो मुझे तोड़ दिया,
और वो भी... बार-बार।
ज़िंदगी — क्या है ये?
अब तक जान न सका मैं।
> चुप बैठा हूँ कई बार,
देखता रहा सबको चुपचाप...
वो भी बार-बार।
अजब सी हो गई है ये ज़िंदगी —
खोया रहता हूँ वहाँ,
जहाँ कोई नहीं होता।
अब क्या करूँ... क्या करूँ...
> हो जाऊँ दुनिया से दूर,
जब कोई न हो अपना।
हो जाऊँ दुनिया से दूर,
जब कोई न हो अपना।
आँसू भी मेरे खो गए,
न रहा कोई अपना।
आँसू भी अब न रहे अपने,
अब क्या करूँ मैं, क्या करूँ…