"तेरे आँचल की पनाह"
कोई कसूर तो ना था मेरा,
फिर भी सबने ठुकरा दिया ना माँ।
लोग ना जाने मुझे क्यों ताना देते है,
इनके तानो से बचा लो ना माँ।
बुरी नज़र है लोगो की,
काला टिका लगा दो ना माँ।
आज फिर नींद नहीं आ रही,
लोरी गा कर सुला दो ना माँ।
भूख नहीं लगती आजकल,
अपने हाथों से खिला दो ना माँ।
जख्म आज फिर से गहरे हो गए,
जख्मों पर मरहम लगा दो ना माँ।
ना जाने किस कश्मकश में उलझी हूँ,
आकर सुलझा दो ना माँ।
बहुत घबराहट सी हो रही है,
अपने आँचल में छिपा लो ना माँ।
एकांत चाहती हूँ बस अब,
दुनियां के शोर से बचा लो ना माँ।
अब तो हर दर्द का इलाज तू ही है,
मुझे फिर से बच्चा बना दो ना माँ।
Kirti Kashyap "एक शायरा"✍️