“ममता की मूरत – माँ”
उसकी गोद ही मेरी पहली दुनिया, उसके आँचल में हर सुख पाया। ममता के मीठे झरनों से, जीवन का पहला गीत सुनाया।
तेरी मुस्कान से सुबह सँवरती, तेरे आशीष से राह निकलती। तेरी दुआओं की छाया के नीचे, हर ठोकर पर हिम्मत मिलती।
जब भी डर से मन काँप गया था, तेरे शब्दों ने ढाल बनाया। जब भी आँसू से आँखें भीगीं, तेरे आंचल ने प्यार निभाया।
तेरे हाथों की रोटी में स्वाद नहीं, बल्कि ममता का सागर बसता। तेरे स्पर्श से रोग भी मिटते, तेरी छाया में दुख भी हँसता।
माँ… तेरे बिना ये जीवन अधूरा, तेरे बिना सब कुछ सूना-सूना। तेरे होने से घर मंदिर बनता, तेरे जाने से लगता वीराना।
तेरी गोदी ही सबसे प्यारी धरती, तेरा आँचल ही सबसे ऊँचा गगन। तेरी दुआ ही सबसे सच्ची इबादत, तेरा नाम ही सबसे पावन जीवन।
तू ही वो सपना जो भगवान ने, मेरे हिस्से में साकार किया। तू ही वो गीत जो जीवन ने, मेरे दिल में बार-बार गुनगुनाया।
माँ… तू ही मेरी दुनिया, तू ही मेरा जहाँ, तेरे बिना सब कुछ बेकार। तेरी दुआओं से साँसें चलतीं, तेरी ममता से जगत गुलज़ार।