"दर्द-ए-सदा"
याद उसकी आ रही है बहुत,
दिल मेरा दुखा रही है बहुत।
तरसती निगाहें इक दीदार को,
तस्वीर उसकी सता रही है बहुत।
चुप-चुप बहती है तन्हाई मेरी,
ये रातें मुझे आज़मा रही हैं बहुत।
हर साँस में घुले हैं ख्याल उसके,
ये तन्हाई अब रुला रही है बहुत।
शायद हवा कुछ कहना चाहती है,
कोई दर्द-ए-सदा आ रही है बहुत।
तड़पता दिल, उखड़ती साँसे “कीर्ति”,
उसकी रुह मेरी रुह से दूर जा रही है बहुत।
Kirti Kashyap"एक शायरा"✍️
“दर्द-ए-सदा” = मन की गहरी पीड़ा/तड़प