हां, हां, मैं भारत की नारी हूं
छाया हूं मैं, धूप हूं, रंग और रूप हूं,
देश के आंचल में खिली हुई क्वारी हूं।
हां, मैं भारत की नारी हूं।
राह हूं मैं, मंजिल हूं, वतन का मैं दिल हूं।
राह ना मिलने पर राह बनाने वाली हूं।
हां, हां मैं भारत की नारी हूं।
नीति हूं, धृति हूं, सभ्यता और संस्कृति हूं।
देश के लिए सब निछावर करती बलिहारी हूं।
हां, हां, मैं भारत की नारी हूं।
विद्या, धन और शक्ति वाहिका हूं,
देश की वीरता की धारिका हूं।
कई वीर वीरांगनाओं की जन्मदात्री हूं।
हां, मैं भारत की नारी हूं।
हां, हां, मैं भारत की नारी हूं।