Hindi Quote in Poem by Renu Chaurasiya

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दिन ढल जाता है,
पर मेरे भीतर की हलचल कभी नहीं ढलती।

लोग कहते हैं —
“तुम तो हँसती रहती हो,
इतनी खुशमिज़ाज हो…”
पर कोई नहीं जानता,
मेरी हँसी के पीछे कितनी बेचैनी छिपी है।

रात को जब सब सो जाते हैं,
मेरी आँखों से नींद भी रूठ जाती है।
दिल जैसे किसी का नाम पुकारता है,
पर होठों से आवाज़ नहीं निकलती।

कभी लगता,
काश कोई मेरे दिल की धड़कन सुन पाता,
तो समझ जाता
कि मैं कितनी उलझनों में कैद हूँ।

ये बेचैनी…
जैसे सीने में बंद कोई अनकही दास्तां हो,
जिसे कहने की हिम्मत
मैं हर रोज़ टाल देती हूँ।

मैं चाहती हूँ सुकून,
पर सुकून मुझसे दूर भागता है।
मैं चाहती हूँ कोई मेरा हाथ थामे,
और कहे —
“तुम अकेली नहीं हो।”

Hindi Poem by Renu Chaurasiya : 111999456
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