Hindi Quote in Blog by Ranjeev Kumar Jha

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भोर की तलाश!
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​रात और भोर के बीच का यह अंतराल ही तो मानव जीवन है।
जब गीत उदास हो जाते हैं, छन्द लड़खड़ाने लगते हैं और रागिनी भी अधीर होकर बंधनों में फँस जाती है, तब भी इंसान गाता है। वह इसलिए गाता है क्योंकि उसके भीतर कहीं न कहीं यह विश्वास पलता रहता है कि हर अंधकार के बाद एक नया उजाला ज़रूर आएगा। इसी विश्वास के कारण वह चाँद के लिए चकोर-सा प्यासा रहता है और रात के आँचल को पकड़कर भोर की याचना करता है।
​मनुष्य का हृदय तो अनंत इच्छाओं का आकाश है। वह हर कली को तितली का चुम्बन देना चाहता है, हर आँसू को आँखों का सहारा मिल जाए, यह चाह रखता है। पतझड़ में झरते पत्तों को देखकर भी वह यह सपना बुनता है कि यह बाग़ फिर से हरे-भरे होंगे। मनुष्य की यही ज़िद, यही चाहत उसे जीवंत रखती है। लेकिन कभी-कभी, नियति—जो पत्थर की लकीर है—इन आकांक्षाओं को तोड़ देती है। और तब थका-हारा, बुझे हुए दीपक-सा वह सूखी आँखों के लिए नमी माँगता है, लोरियाँ माँगता है।
​पर इस धरती पर ऐसा कौन है जिसने पीड़ा का स्वाद न चखा हो? कौन-सा सूर्य है जिसने अपने ही ताप में स्वयं को न तपाया हो? कौन-सा यात्री है जो राह की धूल से न सना हो? यही तो जीवन का सौंदर्य है—दर्द और उल्लास का, ज्वाला और शीतलता का संगम। देह, प्राण और चेतना—ये सब क्षणभंगुर चित्र हैं, और मनुष्य इन्हीं में शाश्वतता खोजता है। काँटों के इस नगर में भी वह फूल की कोमलता को पहचानना चाहता है। यही उसकी आत्मा की सच्ची पहचान है।
​सत्य की तलाश में वह बार-बार उठता है, गिरता है, फिर उठता है। सृजन और विनाश की लहरों में डूबता-उतराता रहता है, पर उसकी आँखें हमेशा उस शांति को खोजती हैं जो उसकी प्राण-सिन्धु की गहराइयों में छुपी है।
​इसीलिए उसकी सबसे बड़ी प्रार्थना भोर है।
रात चाहे कितनी ही गहरी हो, कितनी ही लंबी हो, वह उसके चरणों को पकड़कर बार-बार उजाले की भीख माँगता है। और यह याचना ही उसकी सबसे बड़ी शक्ति है। क्योंकि जो अंधकार के बीच भी उजाले का स्वप्न देख ले, वही अंततः भोर का निर्माता होता है।
​मनुष्य की हार यह नहीं है कि वह टूट गया—उसकी सच्ची जीत यह है कि टूटने के बाद भी उसने भोर की चाह रखना बंद नहीं किया।
आर के भोपाल।

Hindi Blog by Ranjeev Kumar Jha : 111999432
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