लफ़्ज़ों में पिरोया इश्क़, बस अल्फ़ाज़ बनकर रह गया,
मेरी चाहत का सिला, तिरछी-निगाह-ए-नवाज़ बनकर रह गया।
मेरी ख़ामोशियों को लोग तंज़ समझते रहे हर वक़्त,
हर जज़्बात की परछाई, मेरी तन्हाई में राज बनकर रह गया।
Kirti Kashyap"एक शायरा"✍️
तिरछी-निगाह-ए-नवाज़ = नकली मेहरबानी भरी नज़र, प्यार का दिखावा करती नज़र