🎶 बिरहा – पिया बिन मन तड़पे 🎶
पिया बिन मन तड़पे,
नैन बने हैं झरना।
दिन तो काम में बीते,
रैन को है तरसना।।
दूरी दुख से दिल रोवे,
पल-पल जियरा हारे।
तुम बिन सूना लागे दुनियां,
सावन तुम्हें पुकारे।
चंदा पूछे रात अँधेरी,
काहे न आए साजन।
सितवा दे संदेशा नभ से,
आ जाओ अब प्रियतम।
प्रीत बिना सब सूना-सूना,
जीवन लागे बंजर।
आ जा पिया मिलन के पल में,
बिरहा मन में बवंडर।
दिल में उतरे खंजर.......
आर के भोपाल।