एक छोटा-सा गाँव था,
जहाँ ख्वाब बड़े थे।
लड़का कहता था—
“मैं आसमान छू लूँगा।”
लोग हँसते, कहते—
“तेरी उड़ान कहाँ पूरी होगी?”
पर उसने रुकना नहीं सीखा,
कदम दर कदम चलता रहा।
रास्ते कठिन थे,
आँखों में आँसू थे,
पर दिल में एक आग थी—
“मंज़िल मिलेगी।”
सालों बाद,
वही लड़का ऊँचाई पर खड़ा था।
लोगों की हँसी अब तालियाँ बनी,
और वो कह रहा था—
“सपने सच होते हैं,
अगर डर को छोड़ दो।” ✨