"मौसमी लोग"
कुछ लोग मिले ज़िन्दगी में मौसम की तरह,
मौसम की तरह हर पल रंग बदलते गए।
अपना समझा जिनको, सब छलावा ही थे,
एक-एक करके सभी हमको छलते गए।
हवाओं का रुख भी हमेशा ही ख़िलाफ़ था,
फिर भी हम मज़बूत कदमों से चलते गए।
हिम्मत हारना कभी सीखा नहीं था हमने,
हम गिरे कई बार, मगर गिर-गिर कर सँभलते गए।
चुभने लगे सबके दिलों में खंजर की तरह,
और सबकी नज़रों में हम खलते गए।
अपना समझकर जिनको अपना दर्द बताया,
वही मेरे ज़ख़्मों पर बार-बार नमक मलते गए।
अपनों की खुशियों के लिए सब मंज़ूर था मुझको,
इसलिए "कीर्ति" भी हर किरदार में ढलते गए।
— Kirti Kashyap "एक शायरा"✍️