दुनिया ने मुझको त्याग दिया,
गोविंद, मैं हर तरह से हारी हूं।
इन दुष्टों की सभा में खड़ी,
लज्जित होती मैं द्रौपदी बेचारी हूं।
पति मेरे हारे है सबकुछ,
मुझ पर पड़ी आज विपदा भारी है।
इस संकट के घड़ी में
तुम ही मेरी उम्मीद बनवारी हो।
दुनिया ने मुझको त्याग दिया
गोविंद मैं हर तरह से हारी हूं।
रानी से बना दासी मुझको
नजर मेरे चीर पर डाली है
इन दुष्टों ने कर ली
मेरे चीर हरण की तैयारी है
ओ गोविंद रक्षा करो
मैनें हर एक उम्मीद हारी है।
दुनिया ने मुझको त्याग दिया
गोविंद मैं हर तरह से हारी हूं।
इन दुष्टों की सभा में खड़ी
लज्जित हो रही मैं द्रौपदी बेचारी हूं।