मजदूरों ने मकान बहुत ही सुन्दर बनाया है
उन्होंने मकान में अपना खून पसीना बहाया है
बाद में मगर मकान मालिक के कुत्तों ने
मजदूरों को अपने गेट से ही भगाया है
जिसने अपना पैसा खर्च किया है उन्होंने ही हक़ जताया है
ख़ून पसीने और मेहनत की कोई कीमत नहीं है
यही हमने सबको बताया है
मजदूर और मालिक में कितना अंतर होता है ?????
ऐ मजदूरों को बाद में समझ में आया है ।।
नरेन्द्र परमार ✍️