कजरी ---
अरे रामा जियरा जरे
जैसे आग अंगार जुड़ाए
कैसे रामा!
अरे रामा भोरे बोले
कोयलिया जैसे जरत
जिया हहरावे
तरसावे ना!!
अरे रामा वैरी कोयलिया
के बनिया जैसे सेज
शूल बिछावे ना!!
अरे रामा उमड़ घूमड़
आवत बदरवा जिया
डेरवावे ना!!
अरे रामा दिनवा लागे
जैसे रतिया पिया याद
सतावे ना!!
सावन कि रिम झिम
फुहार जिया जुड़ावे ना!!
अरे रामा बैरी पिया के
जिया मे बिरह के
धुआँ उठावे ना!!
अरे रामा सावन कि
फुहार वरसात पिया
मिलन कि बात
बतावे ना!!
अरे रामा सखीयां करत
ठिठोली मारे ताना ना!!
सखी आइहे सजनवा
बोलत कागा अगनवा
पिया मिलन के राग
सुनावे ना!!
सखीयां करत ठिठोली
मारे ताना सावन बौराये
ना!!
सखी अइहे मोर
सजनवा बोलत
कागा मोरे आँगनवा!
कागा बोले पिया प्यार
सावन आवन सन्देश
सुनावे ना!!
नन्दलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर गोरखपुर उत्तर प्रदेश!!