जग जननी माँ
जग जननी माँ, दुःख हरणी, मंगल करनी,तारणहारी,
सकल जगत संसार माँ।!
दुष्ट विनाशक, भय भव भंजक, पल प्रहर अविरल युग प्रवाह माँ
जग जननी तू सकल जगत संसार माँ।!!
पाप विनाशनी, मोक्ष दायनी, जगत कल्याणी, युग गति व्यवहार माँ जग जननी तू सकल जगत संसार माँ।!!
अपराध क्षमा करती, चाहे जो भी गलती, करती तेरी ही संतान युग संसार माँ।!!
माँ तेरी महिमा ब्रह्मा, विष्णु, शंकर गाएं, तेरी महिमा अपरंपार माँ जग जननी तू सकल जगत संसार माँ।!!
देवों की देवी, स्वर्ग नर्क उद्धार माँ, धन वैभव सुख संपत्ति दाता।
तुझे नित्य दिन जो धावे, तेरा ही ध्यान लगाएं, सकल मनोरथ पावे भव सागर से तू ही करती बेड़ा पार माँ।!!
स्वांस प्राण आधार माँ, जग जननी तू सकल जगत आधार माँ।!!
भक्तों की शक्ति अवनि आकाश ब्रह्मांड माँ, जग जननी तू सकल जगत संसार माँ।!
पार्वती राधा रुक्मिणी अर्धनारीश्वर ईश्वर की श्रृंगार माँ, जग जननी तू सकल जगत संसार माँ।!
माता ममता तेरा आँचल हम बालक नादान माँ, जग जननी तू सकल जगत संसार माँ।!
नंदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर गोरखपुर उत्तर प्रदेश।!