🧍♂️ "मैं भी इंसान हूँ" 🧍♂️
(एक लड़के की ख़ामोश पुकार)
मैं भी हँसता हूँ, मैं भी रोता हूँ,
पर दुनिया को दिखा नहीं सकता हूँ।
"मर्द को दर्द नहीं होता" —
इस झूठ को कब तक ढोता हूँ?
मैं भी थकता हूँ, मैं भी टूटता हूँ,
कभी अकेले में चुपचाप बिखरता हूँ।
पर सब कहते हैं, "मज़बूत रहो",
तो हर आंसू दिल में ही छुपाता हूँ।
मेरे भी सपने हैं, मेरे भी डर हैं,
कुछ अधूरे वादे, कुछ भूले हुए सफ़र हैं।
मैं बहादुर हूँ, पर भावुक भी हूँ,
मैं भी अपने ज़ख्मों से जूझता हूँ।
सिर्फ बेटी ही नहीं,
बेटे को भी समझो, सुनो, अपनाओ।
वो भी इंसान है,
उसे भी जीने दो, रोने दो, बाहों में समाओ।
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📌 शीर्षक: "मैं भी इंसान हूँ"
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