Hindi Quote in Poem by Sunita bhardwaj

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वो दिन.......... याद है?
जब आपने कहा था," बताओ क्यू उदास हो"....
और मैने कहा सिर्फ इतना कहा ___ "कुछ नहीं"....
लेकिन उस "कुछ नहीं"के पीछे
एक मम्मी के गुजर जाने का ग़म छुपा था...
एक रिश्तेदार दोस्त के बिखरे सपनों का बोझ था...

और मेरी आंखों में एक चुपचाप तूफान थी...
मै कुछ नहीं कह पाई
क्योंकि कभी कभी दर्द इतना घना होता हैं
कि जुबान भी भींग जाती हैं....
और आपने शायद मेरी खामोशी को "दूर रहना" समझा...

उस समय आपके पैसे की चिंता,
आपका का पूछना...
सब था _____एक अपनापन....
पर मैं टूट रही थी, और जोड़ नहीं पा रही थीं...
आप गए....
शायद गुस्से में, शायद उदासी में शायद
कोई ऐसी बात से जो मै कह नहीं पाई...

आज भी नहीं कहना चाहती,
सिर्फ इतना महसूस करवाना चाहती हूं ___
आपसे दोस्ती मेरी गलती नहीं थी,
और मेरी खामोशी मेरी झूठ नहीं थी।

अगर कभी आप वापस आए,
तो मैं सिर्फ दोस्ती का हाथ दूंगी....
शिकायत का नहीं, समझ का हाथ...
और नहीं आए तो ये संदेश मेरी डायरी में बंद रहेगी ___

(सुनीता)

Hindi Poem by Sunita bhardwaj : 111986681
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