Hindi Quote in Shayri by parth Shukla

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"अपने ही पराए हो गए"

घर जिनको कहते थे, वो अब जंजीर बन गए,
अपने ही लोग मेरे लिए तीर बन गए।
जिन हाथों ने कभी दुलार से छुआ था मुझे,
आज वही हाथ मेरे लिए ज़लील बन गए।

ना चाहते हैं, ना अपनापन जताते हैं,
हर बात पे ताना, हर लम्हा सताते हैं।
मेरे आँसू भी अब उन्हें नजर नहीं आते,
वो बस अपने ग़ुस्से में मुझे मिटाते हैं।

छत है मगर साया नहीं है किसी प्यार का,
जिस्म ज़िंदा है पर दिल मर चुका है हर बार का।
घर तो है पर उसमें अब घर जैसा कुछ नहीं,
हर दीवार गवाह है मेरी टूटी हर उम्मीद की।

काश कोई सुनता इस दिल की खामोशी,
काश कोई समझता मेरी मजबूरी और बेबसी।
पर मैं फिर भी मुस्कुराता हूँ हर चोट छुपा के,
क्योंकि आदत हो गई है अब तन्हाई निभा के।

Hindi Shayri by parth Shukla : 111986555
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