" डर मौत से नहीं साहब.......
जिंदा लोगो के बर्ताव से लगता है....। "
सच तो है सब किसी अपने की मौत होने पर रोते है मातम मनाते है उस इंसान की कमी कभी पूरी नहीं हो पाती । पहले मैं भी ऐसा ही सेंसिटिव हो जाती थी किसी की खबर सुन कर लेकिन अपने अलग अलग अनुभव देख कर यही महसूस होता है कि मौत उतनी डरावनी या पीड़ा देने वाली नहीं होती । किसी के जाने पर दुख या शोक तब ही ज्यादा होता है जब हम उन्हें जितना चाहते है या जितना उनके लिए करना चाहते थे वो एक्सप्रेस करना अधूरा रह गया..... कही कमी रह गई ....और यही चीज बार बार हमें उनकी याद दिलाती है कि कैसे उस इंसान ने हमारे लिए इतना कुछ किया था और हम कुछ कर नहीं पाए । लेकिन इस एहसास का अब क्या मतलब ? जो गया अब वापस नहीं आ सकता । मैंने अपनी सबसे करीबी को कैंसर से जूझते हुए देखा है उनकी सेवा की हैं और उसी दौरान लोगों का बर्ताव भी देखा हैं मैं इससे इतना सिख गई हु कि जो भी आपके अपने हैं या दूर के हैं उनके लिए हर दिन उतना करो कि अगर कही कुछ हो तो वो कमी अंदर से खाने ना लगे मन को।
असली प्यार और सहानुभूति भी है जो जिंदा रहने पर जताई जाए । बाकी जो भी जन्मा है उसका जाना तय है मेरा भी मेरे अपनों का भी मेरे ईर्द गिर्द जितने हैं सबका जाना तय है । दुनिया में कोई जन्मा है तो अपनी मृत्यु निश्चित करके ही जन्म लिया है। मौत निश्चित हैं बस अचानक होती है और इसके कई तरीके पीड़ा दायक है इसलिए डर लगना लाजमी है पर ये निश्चित है इससे डर सकते है पर भाग नहीं सकते । चाहे वो खुद की हो या किसी अपने की।
लेकिन इससे भी डरावना है लोगो का कर्म, व्यवहार ....अपनी बात सही से समझाना चाहूं तो रेप या मर्डर केस ही ले लीजिए क्या उस जिंदा इंसान से ज्यादा कुछ डरावना लगता है, उसने जो किया वो सुन कर सोच कर रूह कांप जाती है । मौत से डरवाने तो ये लोग हैं। फिर उससे भी ज्यादा डरावना लोगो का बर्ताव आपको शायद सुसाइड कैसे उतने सिहरन पैदा करने वाले नहीं लगते होंगे पर क्या जब कोई " अतुल सूइसाइड कैसे की तरह रोज प्रताड़ित होता हो। किसी के बर्ताव से , आस पास समाज और सुरक्षा निश्चित करने वाले हर कुनबे से चाहे वो कोर्ट हो कानून हो, समाज के करता धरता हो सबके रूखे और खोखले बर्ताव ने क्या हाल किया होगा । मानसिक प्रताड़ना इतनी गहरी इतनी पीड़ादायक होती है कि जिसकी हम कल्पना भी नहीं कर सकते । रेप जैसी चीजों गुजरे बच्चे बच्चियां, लड़की लड़का कभी उस मानसिक पीड़ा से निकल ही नहीं पाते । मैने कोई टाइपिंग मिस्टेक नहीं की है लड़के भी इसका शिकार होते है छोटे भी और युवा भी और उन पर भी ये चीज उतनी ही असर करती है ।.....