कल परसों एक दुर्घटना घटी
ढाई सौ बंदों ने मौत की उड़ान भरी,
किस पर लगाए इल्जाम
ना मालूम हुआ ग़लती किस से हुई?
पलक झपकते मौत कहा आई होगी?
आग लगी जिस्म जला तकलीफ़ तो हुई होगी।
जहाज ज्वालामुखी बनकर फटी होगी,
चीखे तो सबकी निकली होगी।
सभी ने मौत को सामने जब देखा होगा,
एक दूसरे को मदद के लिए तब पुकारा होगा।
लाशों का बिछ गया ढेर था,
ये हादसा कितना भयानक था।
इतनी जिंदगी मौत से हारी,
हे परमात्मा,
इन आत्माओं पर रहमत करने की आई आपकी बारी।
ॐ शांति