कलाकार:-
वो जो दीवार पे उंगलियों से आकृति बनाता है,
वो कोई बच्चा नहीं, एक कलाकार होता है।
जो हर चीज़ में कहानी ढूंढ ले,
जो अकेले में भी भीड़ सी महसूस कर ले,
जो खामोशी को भी सुने…
हाँ, वही तो होता है कलाकार।
जिसकी आँखें तो सपनों में होती हैं,
पर दिल… दिल कहीं टूटे हुए से जोड़ रहा होता है।
वो रंगों से नहीं, जज़्बातों से खेलता है,
हर तस्वीर में थोड़ा खुद को ढाल देता है।
उसे तालियाँ नहीं चाहिए,
बस कोई समझ ले… बस इतना काफ़ी है।
कभी-कभी वो हँसता है,
पर उसकी आँखों में दर्द छुपा होता है।
और वो कहता भी नहीं…
क्योंकि वो बोलता नहीं, बना देता है।
कलाकार होना आसान नहीं होता…
पर जो होते हैं, वो बहुत खास होते हैं।