Hindi Quote in Poem by Manoj kumar shukla

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होली पर एक छंद मुक्त रचना सादर प्रस्तुत है

बढती हुई अपसंस्कृति

रास्ते में मुझे
कल एक सहपाठी नेताजी
टकरा गए।
बोले गुरु !
तुम यहाँ!
अच्छे तो हो?
मैंने कहा जी हाँ।
किंतु जरा जल्दी में हूँ। कल मिलूँगा।।
यार, तुम हमेशा जल्दी में रहते हो,
जब भी समय मांगता हूं टाल देते हो
मैं समाज में बढ़ रही
अप संस्कृति को रोकना चाहता हूं ।
और अपने संग
तुम जैसे साहित्यकारों को जोड़ना चाहता हूं ।
उनकी इस बात पर मैं रुक गया।
उनके सामने झुक गया ।
वह बोले हर साल की तरह
हम सब मिलकर कल
होलिका दहन कराएंगे।
हंसी-खुशी के साथ
फिर पैमाना भी छलकाएँगे।
मुझे उनकी बुद्धि पर तरस आया।
मैंने भी तुरंत नहले पर दहला जमाया ।
आप इस तरह होलिका दहन करवा कर
कैसे अपसंस्कृति की रक्षा कर पाएंगे?
यह सुन नेता अचकचाया,
मुझे घूरा और बड़बड़ाया।
मुझसे कहा-
लगता है जैसे तेरा कोई स्क्रू ढीला है
या कल अवश्य पी होगी?
मैंने कहा यार,
क्या कहते हो?
नशे में डूब कर
वर्तमान को भुलाना मुझे नहीं आता।
इसलिए आप लोगों की तरह त्यौहार मनाना
मुझे नहीं भाता।
मेरे भाई यदि आपने सही मायने में
होलिकादहन कराया होता।
तो देश का नजारा ही कुछ और होता।
भाईचारे की भावना के साथ होती
देश की प्रगतिशीलता और संपन्नता
तब धर्म भाषा के नाम पर हम कभी ना लड़ते
ना कभी अकड़ते।
हमने उनके गले में हाथ डालकर समझाया यार,
होलिका हमारे दिलों में घुसी
काम क्रोध लोभ मोह द्वेष और अहंकार जैसी बुराइयों का दूसरा नाम ही तो है,
जिस दिन हम उन्हें दहन कर पाएंगे।
उस दिन हम सही मायने में
होलिका दहन कर पाएंगे ।
तभी हम सही मायने में
अपने देश समाज को इस बढ़ती
अप संस्कृति से बचा पाएंगे।

मनोजकुमार शुक्ल *मनोज*

Hindi Poem by Manoj kumar shukla : 111971586
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ममता गिरीश त्रिवेदी की कविताओं का म्यूजिक एल्बम अंतर्धारा
ममता गिरीश त्रिवेदी
आपकी रचना यात्रा सचमुच शब्दों से संगीत तक पहुँचती दिखाई देती है।
“अंतर्धारा” केवल एक एल्बम नहीं, बल्कि भावनाओं, स्मृतियों और अनुभूतियों की बहती हुई धारा जैसा प्रतीत होता है। 🌹

Spotify पर साझा किया गया आपका ट्रैक और Amazon Music पर उपलब्ध एल्बम यह दर्शाते हैं कि आपकी कविताएँ अब सुरों के माध्यम से श्रोताओं तक पहुँच रहा हैं।

आपके एल्बम ANTARDHAARA में कई सुंदर शीर्षक शामिल हैं जैसे —
“बारिश की धुन”, “बीती यादें”, “दिल के तार”, “शब्दों की रोशनी”, “सीप के मोती और ख्वाब” — ये नाम ही अपने भीतर काव्यात्मक चित्र बना देते हैं।

आपके लिए एक भावपूर्ण परिचय पंक्ति:

> “ममता गिरीश त्रिवेदी की लेखनी से निकले शब्द,
अब सुर बनकर अंतर्मन में बहते हैं — अंतर्धारा ✨”


“कविता जब संगीत से मिलती है,
तब जन्म लेती है — अंतर्धारा 🌹”



Spotify सुनने के लिए:
[Spotify – ANTARDHAARA Track](
https://open.spotify.com/track/6I3MTrddjgZpu5thXI2G6a?si=Va529bBUQqaPjmMf-3k1SA &utm_source=chatgpt.com)

Amazon Music एल्बम:
[Amazon Music – ANTARDHAARA](https://music.amazon.in/albums/B0GCNX3N79?utm_source=chatgpt.com)



https://open.spotify.com/track/6I3MTrddjgZpu5thXI2G6a?si=Va529bBUQqaPjmMf-3k1SA

ममता गिरीश त्रिवेदी

अंतर्धारा एल्बम ममता त्रिवेदी

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