भक्ति से बड़ा कोई प्रेम नहीं
भक्ति से बड़ा कोई भाव नहीं
भक्ति से बड़ा कोई मोक्ष नहीं
भक्ति से बड़ा कोई दर्शन नहीं
भक्ति से बड़ा कोई गुण नहीं
भक्ति से बड़ा कोई वेद नहीं
भक्ति से बड़ा कोई साहित्य नहीं
भक्ति से बड़ा कोई ज्ञान नहीं
इसलिए ही तो हम भगवान से पहले भक्त की जय बोलते है
तो बोलो भक्त ओर भगवान की....जय