माँ की शक्ति
सालों तक दर्द सहे, चेहरे पे मुस्कान रही,
हर मुश्किल से लड़ी, पर हिम्मत अटल रही।
ग़म की अंधेरी राहों में, वो रोशनी जलाती थी,
अपनी संतान के लिए, हर दुख को छुपाती थी।
हर सुबह उम्मीदों संग, नया हौसला लिया,
हर शाम थककर भी, जीने का फैसला किया।
जब तक औलाद अपनी आत्मनिर्भर हुई,
तब तक उसने डटकर मुसीबतों से की लड़ाई।
यह माँ की इच्छाशक्ति थी और भगवान का वरदान,
कि सब सही-सलामत होने तक माँ को मिला जीवनदान।